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फोबिया

फोबिया

  जदुनाथ हीरापुर मे रहते हैं। एक उच्च शिक्षित ब्यक्ति। घर से लगभग अशी किलोमीटर दूरीपर रामनगर की किसी सरकारी दप्तर मे सहकारी आफिसर की नौकरी करते हैं। अब दस साल होगेया उसका स्त्री रीता की साथ घर बसाने का। रीता एक सर्बगुन संपन्ना लड़की। रूप गुन चारों ओर से एकदम उत्तम। किसी मे भी कोई कमी नहीं। दो बच्चों को जन्म देचूकी है। बड़ा का नाम राम और दूसरा का श्याम। उम्र मे केबल दो बर्ष की अंतर। दोनों हीरापुर प्राथमिक विद्यालय मे पढ़ाई करते हैं। राम पाँचबी और श्याम तृतीय क्लास मे पढ़ते हैं,इसका एक बडा बजह यह हे की उन के दादी माँ जिसकी उम्र अब सत्तर साल घर और गांब छोड़ के कहीं जानेकेलिए तैयार नहीं। गांब मे उनके कुछ जमीन जायदाद भी हे उसे कौन देखेगा,यही रहता जवाब दादी माँ की उनके लिए जब कभी कोई उनसे पूछता की तुम कियूं नहीं जदुनाथ के साथ रामनगर मे एकसाथ  रहते।

  जैसे भी हो जदुनाथ सप्ताह मे एकबार सनिबार देर रात को आपनी घर हीरापुर मे पहंचते हैं। उस वक्त बच्चेलोग सोचुके होंगे। लेकिन माँ जितिना देर हो न कियूं जदुनाथ को घर आनेतक उजागर ही रहती। बहु रीता से बार बार पूछती काहाँ तक जदुनाथ आया है। रीता इसीलिए जदुनाथ को फोन मे बार बार पूछा करती थी की व अब काहाँ तक आचुके हैं। उसकी प्रति माँ की ममता और स्त्री रीता की प्रेम जदुनाथ को ईतिना दूर से खींच लाता था। कितना रात कियूं ना हो ,देर के बाद ही सही व घर आता था। माँ की पास बैठता था।माँ की हर बात का जवाब देने के बाद बच्चों के ऊपर जरा नजर बुलाके खाना खाने के बाद सोजाता था। ये उसका एक नियमित जीबन की हिस्सा था।

  सुबह बड़े सबेरे से बच्चों लोग उठ जाते थे। पिताजी को देख के बहत खुस होते और गोद मे बैठने को आपस मे झगड़ने रहते तो दादी माँ  बोलने  लगती,देखो सही सही बाता रही हूँ बात मानों, झगड़ा बन्द करो नहीतो रात को भूत आजाएगा। भूत की नाम सुनते ही बच्चेलोग तुरंत चुप होजाते। जदुनाथ माँ को माना करता था। कहता था,मत करो माँ। बच्चों को भुत की नाम पे डराने से भूत का डर बच्चों की मन मे रहजाता है,लेकिन माँ समझती काहाँ। जदुनाथ को डाँटतेहुए बोलती तू चुप होजा जदुनाथ। तुझे क्या पता बच्चों के बारे मे। बच्चों मे डर नहीं रहेगा तो वे बदमास बनजाएँगे,तब तू क्या करोगे जदुनाथ। में हमेसा ऐसे ही उनके झगड़ा बन्द करती  आई हूं। जदुनाथ का जवाब रहता। तु समझेगी नहीं माँ। फिर परिबार की साथ एक दिन बिताने के बाद जदुनाथ सोमबार को रामनगर चलाजाता। बच्चों को उनके मुरादों को पुरिकरने के आस्वासना देतेहुए।


  उसदिन साम की समय  दादी माँ बच्चों को डरानेकेलिए भूत की कहानी सुनारही थी। माँ रीता रोसोइ मे कार्यब्यस्त थी।  वेसे ही समय मे बिज्जीली चलिगेई तो श्याम जोर से चिल्लानेलगा,फिर बेहोस होगई। तुरंत आस पड़ोस की सारिलोग इकट्ठा होगये ये जानने के लिए की श्याम के साथ हुआ क्या। ज्यादा देर तक होश नहीं आया तो वे श्याम को अस्पाताल लेगये।

 डॉक्टरजी सारीबात समझने के बात ट्रीटमेंट करनेलगे। कुछ देर बाद, श्याम होस मे तो आया लेकिन हमेसा डरतेहुए कुछ बिल्बिलतेहुए बोलरहाथा। किसी को कुछ बोल नहीं रहाथा। गुमसुम रहता था।

  डॉक्टर साहब श्याम के लिये कुछ दबाई लिखरहेथे। ठीक उसी वक्त जदुनाथ का फोन आया तो रीता डॉक्टरजी को फोन देदी,जदुनाथ डॉक्टरजी को पूछा,डॉक्टरजी क्या हुआ है मेरे बच्चे को। जवाब मे डॉक्टर साहब बोले की उनको फोबिया होगेया है। ये एक बड़ा सा डर की प्रभाव से हुआ है। आपलोग तुरंत उसे कहीं ओर कुछ दिन के लिए घूमने लेजाइए। ये जरुरी है ताकि व उस डर से निकल पाए,अन्यथा दबाई की असर ज्यादा कुछ कर नहीं पाएगा। वेसा ही हुआ। जदुनाथ तुरंत छुट्टिलेके आगये। पूरी परिबार को लेके घूमने दिल्ली चलेगये। दिल्ली मे कुछ दिन घूमने के बाद श्याम भूत की डर से धीरे धीरे निकलनेलगा। कुछ दिन बाद पूरीतरह से स्वस्थ होगेया।

ईसी कहानी से ये सिख मिलती है की ज्यादा डर बच्चों के लिए हमेसा हानिकारक ही है। बुरी आदत से दूर करनेकेलिए बच्चों को डराना केबल एक माध्यम नहीं होसकता बरंग फोबिया का कारण बनसकता हे इसलिए हमें इसपर ध्यानदेने का जरूरत  है।

धन्यवाद.....

  

  
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