Life Blog Directory Btc roulette प्रेम थेरपी | INDIAN STORIES -->

प्रेम थेरपी

  साम की समय। घड़ी मे अब छे बजने बाली ही थी। सबिता की फ़ोन अब तीन बार लगातार बजरहा था। ऐसा नहीं की व सुन पानहीँ रही थी। व वहीं पे पढ़ाई पर ब्यस्त थी। बगल मे एक टेबल पर मोबाइल बजरहा था। फिर भी उठाती नहीं थी,कियूं की व भली भांति ये जानचुकि थी की कॉल किस का हो सकता था। ऐसे ही पांच बार बजने के बाद फोन अपनिआप बंद होगेया। सबिता निश्चित होनेकेलिये देखा तो उसकी अंदाज सच ही निकला। फ़ोन कॉल और किसी की नहीं था बल्कि बंटी का था।
  बंटी एक बदमास सा लड़का। पढ़ाई मे खास नहीं। हमेसा कुछ न कुछ बदमासी करने मे ही सौक रखता था। लड़कियों को कॉमेंट करके किशि की दिल दुखाने मे उसका दिलचस्पी रखता था। जब भी कुछ अबसर मिलता तो तुरंत पॉकेट से मोबाइल निकाल के उसपे कसरत करना उसका दिन प्रतिदिन का काम था। अधिकांस समय मे इधर उधर घूमना फिरना बेकार की बातें करना आदि अनेक कुप्रबृत्तियाँ उन मे भरपूर था। सभी को ये सारे बातें अच्छीतरह से गोचर था। अब व सतरह साल मे पहंच चुका था तो उसका झलक हरतरफ नजर आरहा था।

  सबिता एक सुंदर,शुसिल,चरित्रबान तथा तीक्ष्ण बुद्धि सम्परना लड़की। अब वे एक ही कॉलेज सेंटपॉल मे बंटी के साथ पढ़ती है। बिगत छे महीने पहले वे लोग कॉलेज मे दाख़िलात ली थी। तब से लेके अबतक कोई एक भी अंतरंग बॉय फ्रेंड नहीं थे सबिता की,लेकिन अब क्या होगेया पता नहीं ,बिगत संडे से बंटी का फ़ोन आता ही रहता है। जब फ़ोन पहलीबार आया तो सबिता घबरा गईथी,कियूं की उसे ये पहले से ही पता था की बंटी कैसा एक लड़का था।

  पहली बार जब संडे को बंटी से फ़ोन आया उस वक्त साम को आठ बजने को जारहा था। उसदिन भी व फ़ोन को बजने ही दिया उठाया नहीं था। व कुछ देर के लिए डर गई थी। इधर माँ खानेकेलिए बुलारही थी, मगर मन काहाँ। उसीबारे मे ही सोचता ये रहता था की क्या किया जाए। क्या है ये मुसीबत की हल। समझ मे कुछ नहीं आरहा था। इसी घटना की बारे मे व किसीको कुछ नहीं बताया। अपनी आप और बंटी की बिछ ही रहने दिया। ऐसा करने की पीछे उसकी एक बात थी,की अपनि आप पर एक बहत बड़ा बिस्वास। अंदर से जो उसे ये साहस देरहा था की आगे जो भी होगा देखाजाएगा। उसकी अछि स्वाभव मुश्किल को दूर करनेकेलिए एकदम अनुकूल था। अपनी मन ही मन व ये निर्णय लिया की कियूं नहीं बंटी की स्वभाव मे परिबर्तन लायाजाए ताकि व एक अच्छा इंसान बन सके। कियूं न एसा एक प्रयास कियाजाए।
  मन ही मन ऐसा एक निर्णय लेतेहुए व बंटी की साथ दोस्ती करली थी और अपना अभियान चलाने लगी थी। इसी की तहत व पहले से ही बंटी को माना करचूकी थी की व उसे कभी भी साम को पढ़ाई की समय मे फ़ोन नहीं करेंगे। लेकिन दुस्ट चरित्र ईतिना जल्दी बदलता काहाँ। अपनी मनमानी करता रहता। इसीलिए अब सबिता फोन को बजने ही दिया था। बंटी को भी उसरात नींद काहाँ से आया था क्या कुछ भाबते भाबते रात निकलगेया।

  अग्लीदिन रीडिंग रूम मे दोनों की मुलाकात हुई तो निरोला मे बंटी सबिता को धीरे से बोलनेलगा,काल कॉल कियूं रिसिभ नहीं की थी तो सबिता का जवाब था"में कभी भी अपना प्रतिज्ञया को नहीं तोड़ती"। बंटी समझगई। फिर बोला आज छुट्टी की बाद पार्क को जरा घूमने जाएंगे। सबिता तुरंत हाँ भरदी। फिर वेसा ही हुआ। दोनों छुट्टी कि बाद पार्क गये क्या कुछ बातें हुइहोगी। फिर सबिता बंटी से पुछनेलगी की कियूं हमे ऐसे समय बर्बाद करना चाहिए। इसी समय को हमलोग कुछ अछि काम मे कियूं नहीं नियोयन करना चाहिए। चलो अब बहत होगेया हे आगे और हमलोग इन्हां कभी नहीं मिलेंगे। ऐसे ऐसे करके सबिता बंटी से धीरे धीरे सारे बुरी आदतों को छुड़ानेलगी। ऐसा एक समय आया जहां बंटी पूरी तरह बदल चुका था। एक दम सरल,सृनखलित बनचुका था और इसके पीछे था सबिता की प्रेम थेरापी।

    अब बंटी की ये नबकलेबर देख के सारे लोग सबिता को सरहनाने लगे। वाकई सभी केलिए ये एक आस्चर्य चकित की बात थी ही। दुस्टामि रूपी रोग से छुटकारा पानेका सबसे आसान तरीका प्रेम थेरापी होसक्ता है लोग समझने लगे। ऐसा एक दुरारोग्य रोग से छुटकारा पानेका एक आसान सा तरीका मिलगेया।

धन्यवाद

SHARE
  • Image
  • Image
  • Image
  • Image
  • Image
    Blogger Comment
    Facebook Comment

0 Comments:

एक टिप्पणी भेजें