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  रमेश द्विबेदी एक सॉफ्टवेर इंजीनियर । बेंनगालुरु मे एक प्राइवेट कंपनी की चीफ इंजीनियर रूप मे काम करते हैं। अपना घर दिल्ली मे हैं। नरेश उसका एकलौता भाई जो माता पिता और अपना परिबार के साथ रहता हैं। नरेश दिल्ली मे ही एल.आई.सी मे डी.ओ हैं। दश साल पहले रमेश की शादी सुचरिता से हुई थी। सुचरिता एक अच्छी गृहिणी। रूप गुन मे कोई कमी नहीं। रमेश और सुचरिता के देबब्रत एकलौता बीटा जो अब पांच साल का है। बेंगालुरु की एक निजी अंग्रेजी स्कूल मे पढ़ाई करता है। कोई चीज की कमी नहीं। देबब्रत जब भी कोई चीज के लिए पापा को कहता तो तुरंत लाया जाता था। पिता जी हमेसा अपना साथ खिलाते थे। रात मे नींद नहीं आता तो लोरी सुनाया करते थे और अपना साथ सुलाते थे। ऐसा एक खुशहाल जीबन उनके लिए था। कोई भी झंझट नहीं। एकदम सुंदर संसार चलता था।
  सुचरिता एक सुंदर और चरित्रबान गृहिणी। अपनी घर से दूर रहकर भी कोई समय मिलता तो व फोन पे सास ससुरजी के हाल पूछा करती थी। देबर देबरानी ओर बच्चों की खबर रखती थी।उसकी अच्छी स्वभाव उनको एक अच्छी बहु का दर्जा दिलाया था। परिबार की सभी लोगों के लवा आसपड़ोस तथा रिस्तेदारों ने भी उनको आदर सम्मान करते थे।

 अब सास और ससुरजी बुढापे मे काल जापान करते हैं। सासु माँ हृदय रोग और ससुरजी कैंसर रोग मे पीड़ित थे। उनके उत्तम इलाज के लिये बेंगालुरु बुला के इलाज करवाया, लेकिन रोग का अबस्ता चरम सीमा पर था तो इलाज के बाद भी वे लोग एक के बाद दूसरे चलबसे। सुचरिता सासु माँ और ससुरजी का अस्थि पबित्र गंगा जी मे भी प्रबाह कि और पिंड भी प्रदान किया था। अपना कर्तब्य निष्ठा का पूर्ण परिचय दीया।

  ऐसे एक बर्ष चलागेया। उसदिन साम की समय। रमेश घर आचुका था। बेटा भी स्कूल से घर पहंच चुका था। सुचरिता दोनों बापबेटे को कुछ खानेकेलिए देनेके बाद काम पे चली गई। रसोई घर से एक बड़ा आबाज निकला। तुरंत रमेश और देबब्रत दौड़ गये और देखे की गैस की टंकी फटा हुआ है। धमाके मे सुचरिता मर चुका है। रमेश फिर जो कानूनी प्रक्रिया जरूरी था किया और सब संस्कार आदि कार्य समापन किया। ऐसा एक सुलक्ष्यना स्त्री को रमेश से और माँ को देबब्रत से दुर्भाग्य ने छिन ली।

  अब रमेश और देबेन्द्र के जीबन मे एक कठिन समय आपहंचा। देबेन्द्र एक छोटा बच्चा उसका खयाल रखेगा कौन,ये रमेश के लिये सबसे बड़ा चिंता की बिसय था। हमेसा किसी रिश्तेदार की पास देबब्रत को छोड़ना अच्छा नहीं ये सोच हमेसा रमेश को द्विधा मे डालता था। व इसकी बारे मे अपना दोस्तों ,रिस्तेदारों को पूछा तो सभीने उसको दूसरी शादी करनेकेलिए सलाह देनेलगे।

  वेसा ही हुआ। गुणनिधि नामक एक अर्ध शिक्षित लड़की की साथ उसका बिबाह हुआ। उनको पत्नी और देबब्रत को माँ मिलगयी। कुछ ही दिन के उपरांत गुणनिधि गर्भवती हुई ,फिर एक बेटा का माँ बनगेई। इसी के साथ घर का हालात और देबब्रत की कपाल बदलनेलगा।गुणनिधि अब हमेसा देबब्रत को अपना सत्रु समझने लगा। कोई भी बाहाना बनाके उसको पिता से अलग करने के लिए कोशिश करति रही। और लो वेसा ही हुआ। रमेश भी अब हालात की बोझ मे काफी परिसान था। व गुणनिधि की चाल को समझ ने मे असमर्थ था। कियूं की व गुणनिधि को बहत ज्यादा बिस्वास कररहा था। कई बार पत्नी की प्ररोचना मे देबब्रत को पिटाई भी करचुका था। ऐसा एक माहोल मे देबब्रत जीबन ब्यतीत कारता था।


  उसदिन माँ देबब्रत स्कूल से घर लौटने की पहले कम्पुटर को तोड़ के रखदी थी। फिर पिताजी आये और कंप्यूटर की ऐसा हालत की बारेमे जब पूछे तो गुणनिधि देबब्रत को दोषी करार दिया। रमेश क्रोधित होतेहुए देबब्रत को खूब पिटाई करनेनेलगे। देबब्रत को सुनने को तैयार नहीं थे। व रोनेलगा। रात मे खाना खाने के वकत पिताजी उसको पास बैठाके खाना खिलाया। देबब्रत गुमसुम जोकूछ खाके सोने के लिये अपना कमरे मे गई,लेकिन आज व पापा की ऊपर काफी खफा था। जब देर रात हुआ। लोग सारे सोरहे थे। व दरवाजा खोलके सीधे रेलवे स्टेशन मे जापहंचा। ठीक उसी वक्त एक एक्सप्रेस ट्रेन छोडनेहीवाली थी। देबब्रत ट्रैन मे कहीं पे चलागेया। अभीतक किशी को भी कोई पता नहीं।


  यही से ये सिख मिलती हे की हमेसा अपना संसार एक अच्छी लड़की की साथ करना चाहिए। दूसरा ये भी समझ ना होगा की बच्चों की भी एक मनोस्तात्विक अबस्ता है, उसपर हमेसा हमलोगों को सोचने का जरूरत है।

धनन्यबाद.....

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