सफलता का कुंजी
अब कुछही बर्ष पूर्ब सरकार की ऒर से एक प्राथमिक स्कूल का बन्दबस्त किआ गेया है। गांब की बच्चों लोग इसी मे पढते हैं। उन मे से हरीश एक प्रखर बुद्धिबान लड़का। पढ़ाई से लेके खेलकूद हर चीज मे पारंगम। हमेसा अपना कक्ष्या मे पहला नंबर पर आता है। हर एक प्रतियोगिता मे भाग लेता है। कभी प्रतिजोगिता मे जीतता हे तो काफी खुश और उसाहित होता है। कभी हार भी जाता हे तो काफी निरुस्साहित नहीं होता है। उसकी अंदर स्थित ऐसा एक अदम्य इच्छाशक्ति उस को बड़ा होने के बाद एक बहत बड़ा सफलता दिलाया।
अब व बिस साल का एक हट्टाकट्टा युबक। घर की स्थिति भी उतना अच्छा नहीं। पिताजी की उम्र हो गई है। माँ की देहांत हो चुकी है। हरीश घर का सबसे बड़ा बेटा । दो भाई और एक बहन जो अब स्कूल मे हैं। अभीतक व कोई भी अपना एक धंदा सुरु नहीं किया है। ऐसा एक संधिग्ध समय मे घर की सारी जिम्मेदारी उनकी कंधो पर है। कीं कर्तब विमूढ़ होके अपना कौलिक बृत्ति खेती किसानी अपनाया मगर कोई फायदा नहीं हुआ। इसका एक ये बड़ा कारण ये हे कि व अपना पारंपरिक कौशल में खेती करता है। आमदानी से लागत बड़ता गेया। फिर भी व निराश नहीं हुआ। हालात गंभीर जरूर था कियूं की परिबार की जिम्मेदारी उसपर है।
लेकिन ये सारे बाते होते हुए भी हरीश हमेसा सामान्य रहता है। न कोई परिसानी न कोई घबराहट। हमेसा दृढ़ इच्छासक्ति और अकलान्त परिश्रम के ऊपर उसका बिस्वास। थोडासा आधुनिकता की रंग मे रंगा हुआ है। हमेसा हात मे अपना मोबाइल रखता है। बहत सारे जानकारी खेती किसानी की लेता है। मोबाइल से जानकारी पाने के बाद व और अधिक जानने के लिए कृषि संबंधित कार्यालय जा पहंचा बहत सारि जानकारी लेने के बाद अपना उद्द्योग लगाने को प्रचेस्टा करनेलगा। हरीश की उत्सुकता को देखते हुए कृषि कार्यालय की अधिकारी लोग भी उस को मदत करने लगे। सारे सरकारी सुबिधायें उनको मिलनेलगा। नजदीकी ग्रामीण बैंक भी प्रधान मंत्री मुद्रा योजना के तेहत हरीश को ऋण प्रदान किया। ये सारे सरकारी सुबिधा से लाभ उठातेहुए व अब गो पालन,मेष पालन और मछली
पालन कर के अपनी आप स्वाबलंबी होने के साथ साथ गांब की और कुछ युबाओं को रोजगार देने मे सक्ष्यम है।
पाहाडी इलाका है तो अब व वहां अपना पतित जमीन पर चाय की बगान
लगाया है। ये सारे उद्दोग से अब व प्रति माह लाखों कमाता है।
सबसे बड़ा एक बात ये हे की हरीश अब व साधारण हरीश नहीं हे जो पहले था। अब व लाखों युबाओं के लिए एक प्रेरणा स्रोत है। उसको अनुसरन करके बहत सारे नौजबान खेती किसानी की और उत्साहित होते हैं। हरीश को देशहित में उनका उल्लेखनीय योगदान के लिए सरकार की तरफ से पुरस्कार भी मिलचुका है।
हरीश की यही कहानी से ये सिद्ध हिता है कि अदम्य इच्छा और अकलान्त परिश्रम सफलता का कुंजी है।
धन्यवाद.....



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