Life Blog Directory Btc roulette जीबन संघर्ष | INDIAN STORIES -->

जीबन संघर्ष

जीबन संघर्ष

  सदानंद सालेपुर मे रहता है। एक अनपढ़ गंबार युबक। दरिद्रता उसका बंशगत गुन। जमीन जायदात कुछ नहीं। हररोज मजदूरी करके ही परिबार पोषण करता है। अब छे साल पहले उसका सादी लक्ष्मी से हुईथी। दो बच्चे होचुके हैं। बड़ा बेटा का उम्र पांच तो बेटी की तीन। दिनवादीन परिबार का खर्चा बढ़ता जारहा है। गांब मे भी हर रोज काम काहाँ से मिलता,ऐसे मे परिबार पोषण मुश्किल सा नजर आरहाथा।
ऐसा एक संदिग्ध समय मे नटबर से उसका मुलाकात हुआ। गांब का ही एक थोडासा पढ़ालिखा युबक,पूछा"अरे सदानंद ,अब क्या चलरहा है। धंदापानी सब ठीक तो है। बालबच्चा कितने हैं। दिनभर कितना कमाते हो। गांब मे पैसा काहाँ जो तुम कमापाओगे। अगर चाहो तो मैं एकबात बोलूं। तुम ढेरसारे पैसा कमाओगे।" सदानंद उत्सुकता से बोला बोलो ना।

  सदानंद बोला ईट कारखाना मे काम करनेका। हरदिन तीनसौ से जैदा मजुरी,फिर अधिक समय के लिए ऊपर से टिप्स। पैसा ही पैसा, महिलाओं के लिए भी नौकरी की अबसर। बच्चों केलिए स्कूल की सुविधा। फिर हे क्या कोई द्विधा। मैं अब तेरे जैसी और दस परिबार तैयार करचुका हूं । अगली चार तारिख को मदनपुर रबाना होनेका है। अगर तुम चाहो तो कल ही मुझे बताना।

  सदानंद तुरंत घर चलागेया और लक्ष्मी को सारी बातें बतादिया। लक्ष्मी भी तुरंत हाँ भरली। फिर चार तारीख को परिबार लेके नटबर के संग मदनपुर निकलपड़े। नटबर मदनपुर पहंचनेके बाद उनको लेके मालिक के पास पहंचा। मालिक उनको कारखाना की कॉलोनी मे रहनेकेलिए भेजने से पहले बोलै,"सुनो नटबर तुम्हे जोकूछ बताया वेसा ही होगा।" इतना कहके एक नौकर को उन लोगोंको कारखाना स्तिथ कॉलोनी मे रहेने को कमरा दिखानेकेलिए भेजदिया। उपरांत नटबर जो एक दलाल को दस हजार रुपैया बाक्सिंस देके रबाना करदिया।

  सदानंद अगली दिन से ही ईट कारखाना मे काम करनेलगा। नजदीकी स्कूल मे गोपाल को पढनेकेलिए दाखिल कियागेया। माँ लक्ष्मी घर पर बेटी के साथ कामकाज सम्भालनेलगी। ऐसे तीन साल चलागेया। कुछदिन बाद सदानंद को लगातार बुखार हुआ। आस्पताल लियागेया। अस्पाताल मे ही देहांत होगेया। परिबार केलिए एक दुर्दिन का समय आगेया। बगल की जो आसपड़ोस लोग थे वे सहयोग का हाथ बढ़ाए और  सदानंद का अंतिम सत्कार कियागेया। मालिक भी कुछ अग्रिम सहायता प्रदान किया। लक्ष्मी केलिये एक दुःख की घड़ी बनगया। अब बच्चों के सारि जिम्मा उनपर। कमानेवाला तो चलागेया,क्या करेगी व। मजदूरी करनेलगी ईट कारखाने मे। बेटा गोपाल का पढ़ाई ठप होगेया। व अब बहन और घर की जिम्मा लेनेलगा। ऐसे ही एक दयनीय जीबन चलनेलगा।

 कारखाना की प्रदूषित बाताबरण हेतु लक्ष्मी भी एक गंभीर बीमार मे ग्रसित हुआ। अब गोपाल करेगा क्या,चिंता का बिसय बनगया। सारि संसार अंधकार जैसा लाग्नेलगा। पैसा नहीं था तो उत्तम चिकित्सा के अभाव हेतु लक्ष्मी भी आख़िरीदम तोड़ दी। आसपड़ोस की लोग फिर एकबार सहयोग करके लक्ष्मी का अंतिम संस्कार निपटालिए। मालिक भी कुछ सहायता अग्रिम रूप मे प्रदान किये। माता-पिता दोनों चलेगये। परिबार का सारि जिम्मेदारी गोपालपे आपहंचा। अब व करेगा क्या। कारखाना मे मजदूरी खटने के लाबा उसके पास और कोई चारा ही नहीं। वेसा ही करने लगा। बहन को स्कूल मे दाखिल कराया। गोपाल मजदूरी करनेलगा। कडीसी कड़ी मेहनत करके बहन बॉबी को खूब पढ़ाया।
अब बॉबी बड़ा होगेया है। अच्छी पढ़ाई करतिथि तो गांब मे ही अस्पाताल मे सेविका पद की नौकरी मिलचुकि है। महीना दस हजार रुपैया तनखा। बारबार मना करती गोपाल को ,भैया अब बहत होगेया मत करो और मजदूरी। चलने मे अब हमारा कोई मुश्किल काहाँ है। हँसतेहुए गोपाल बोलता,तू समझेगी काहाँ पगली,मेरा एक काम अब बाकी है। पहले उसे निपटानेदे फिर मुझे कभी और मजदूरी करना नहीं पड़ेगा।


धन्यवाद.....
SHARE
  • Image
  • Image
  • Image
  • Image
  • Image
    Blogger Comment
    Facebook Comment

0 Comments:

एक टिप्पणी भेजें