सफलता का महा मंत्र
हर कार्यकी पीछे कोई न कोई मकसद रहता दोस्तों। कोई चाहे इसे नकार सक्ता मगर है एक बास्तविकता। भाग दौड़ भरा राज मारा जिंदगी में किसे सफलता चाहिए नहीं होता दोस्तों। हर कोई चाहता हर कोई भागते इसकी पीछे। अबशोस ये की सभीको नहीं मिलता सफलता। पूरी नहीं होते मनकी मुरादें। सपनें सपना बनकर कभी राहजाते। तब मन में आता एक बिरोधा भास और जरूरी बनजाता जाननेको सफलता का मूल मंत्र को।
विफलता का प्रभाव
जब कभी कोई एक कार्यमें हमे मिलता असफलता साधारण तौर पे इसकी असर देखनेको मिलता सर में। एक नकारात्मक मनोभाव का उद्रेक होता व कार्य तथा उसके सम्पर्कित चीजों के प्रति। केवल इतना ही नहीं होता इसकी प्रभाव से प्रतिक्रिया स्वरूप दिन प्रतिदिन जिबिन में प्रचलित बाकी सारे कार्यों में आजाता शिथिलता। कभी कभी सम्पूर्ण रूप में आजाता स्थाणुता। जिबनकी गाड़ी तब अपनी चिरचरित पटरी से उतरने लगता धीरे धीरे। मस्तिष्क को लेजाता complex stage में जहां ब्यक्ति ये समझ नहीं पता कि व आगे क्या करे।
समाधान का उपाय
जब कभी किसी समय किसीकी जिबिन में ऐसे एक स्थिति उत्पन होजे तो निपटना सरल और सहज नहीं होता। लोग अक्सर कहते हैं कि मनोविकार का कोई दबाई नहीं होता। ऐसी परिस्थिति में उस ब्यक्ति के लिए चाहिए होता आत्मबिस्वाश बढ़ाने का। अच्छि सलाहों का और motivational speach तथा आध्यात्मिक आचार और विचारों का। जहां से मिलता मरीज को मानसिक बिकारसे शांति और शारीरिक पीड़ा से मुक्ति। धीरे धीरे व ब्यक्ति अपनी जटिल परिस्तिति से उभरने लगता जब उसकी अंदर बढ़ने लगता आत्मबिस्वाश, सका -रात्मकता आजाता पुनः व जिबिन संग्राम में नियोजित होजाता पानेको कोई एक सफलता।
सफलता कैसे मिलता
मित्रों,आप लोग सुना होगा एक quotetion की अंधेरे में लाठी चलाने से कोई लाभ नहीं होता। तब किसी भी कार्य मे मिलती सफलता जब व कार्य की सफलता के लिए निर्धारित नियमों को सुचारू रूप से निपटा जाता। इन सारे नियमों को जब पर्याय क्रम में निरंतरता की साथ निपटा जाता तो सफलता जरूर मिलता। ये है एक सरल मगर उपयोगी मंत्र जिसे संभब्य सफलता अक्सर मिलता। जहां से सूत्रपात होता और कुछ नया करने का इच्छा जो जिबिन को करता जाता बिकाशोंन्मुखी। जिबनको सफल बनाने में बनता सहायक।
यहीं से ये सिख मिलती है की सफलता सभीके लिए है जरूरी। सभी को अपनी जिबनको बनानाहोगा सफल। इसी लिए सभी मे लानी होगी व दक्ष्यता। सभी मे जगानी होगी व अत्मविश्वास सफल बननेका। जब चरितार्थ होगा ये एक परिकल्पना तब मानबता का होगी पुनः उत्थान।

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