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तुम मे है समाधान

तुम मे है समाधान


  अविनाश का जिगिरी दोस्त प्रताप। हमेसा बचपन से ही एक साथ पढ़ते थे।अब वे स्नातक पास करके नौकरी तलास मे हैं। बहत सारे कोशिशों के बाबजूद नाकामयाब हो चुकेहैं। इसीलिए दोनों परिसान मे हैं। घरवालों से भी अब पहले जैसे आदर सम्मान बन्द होगेया है। इसका एक ही कारण ये है की वे बेकार की जिंदगी जी रहेहैं। उनको भी ये सब बातें अच्छा नहीं लगता। हालात आकर एसा होगेया है की दोस्तलोग भी सुनने की बात तो अलग देखते ही भागते हैं। फोन कॉल भी उठाते नहीं। ऐसा एक परिस्थिति मे वे मानसिक स्तर पर काफी परिसान रहते थे।

  अपनि आप को मानसिक तनाव से दूर रखने केलिये प्रयास करतेहुए दोनों एक साथ इधर उधर घुमते रहतेथे। सेहर से दूर सुनसान जगह पे घंटो बितातेथे। कुछ योजनाएं बनातेथे,लेकिन उन मे ऐसा साहस काहाँ था की जिस के बल पर वे कुछ करसकें। कुछ दिन से वे ऐसा ही करते आरहेहें। जब देर रात घर आते थे घरवालों से बात सुनना पड़ता था। ये सारे नियमित बातें उनको दिनवा दिन और हतोस्साहित कररहा था। फिर भी उन मे एक अच्छा आदत ये था की जीबन को आसान बनाने का तरीका ढूंढना।

  एक दिन की बात,आपस मे बातचीत चलरहा है। अविनाश प्रताप को बोला,"अरे प्रताप,अब और जीनेको मन नहीं लगता। जीबन मे मैं कुछ करपाउँ वेसा तो मुझे लगता नहीं। सोचता हूँ अब आगे और घरवालों के परिशानियाँ कियूं बढाऊँ।

  प्रताप: अरे पागल हो गयेहो क्या। कैसे कैसे बातें करते हो। हम से भी और जैदा कितने लोग हमारे जैसे हालात मे हैं। कामयाबी हरकिसी की बस का बात नहीं है। हम लोग कोसिस कररहे हैं,अबश्य एक न एक दिन कामयाबी मिल ही जाएगा। तुझे एक बात बोलूं?

  अविनाश: बोल ना। बात क्या है।

  प्रताप: याद कर,दो साल पहले,मदन हमारे सहपाठी का ठीक वैसा ही हालात था, हमारे से जैदा बुरा। व बिलकुल हतोस्साहित होके आत्म हत्या करने ही वाला था। सौभाग्य बसत उनका पिताजी देखपाये थे। उसका जीवन बच गई। डॉक्टर की सलाह लियागेया। डॉक्टर बोले, मदन को ट्रीटमेंट के साथ साथ उपदेशन की भी जरूरत है। वेसा ही किया गेया अब व एक स्वस्त जीबन बितारहा है। एक निजी स्कूल मे भी अद्यापना कररहा है। तो मे सोचता हूँ की उस से सलाह मसुरा करके कियूं न हम कोई उपदेशक से अच्छा सलाह लें ताकि हमारा जीबन भी सुधार जाए।

  अविनाश: अच्छा ऐसा बात ।

  प्रताप: भाई तू जो भी बोल,मेरा तो मन कहता है की जाके व उपदेशक से कुछ परार्मश लेना ही चाहिए। तू क्या सोचता है।

  अविनाश: बिल्कुल,ठीक है। चल अभी ही पुछलेते हैं मधु से उपदेशक का पता मदन से। 

  प्रताप: ठीक है, चलो चलें.....

  दोनों जाके मैदान से सारे बातें पूछते हैं और उपदेशक से परामर्श का समय लेलेते हैं। जो साम की छे बजे था। ठीक उसी वक्त वे उपदेशक के घर जापहंचे। कालिंग बेल दिए तो मिश्र जी अंदर आनेको इज़्ज़ादत देदिये। मिश्र जी पहले से ही उन लोगों को पहचानते थे।

  प्रताप: नमस्ते सर जी.....
  अविनाश: नमस्ते सर जी.....

  मिश्र जी: नमस्ते,नमस्ते(अंदर घुशतेहुए)बेठो। कैसे आनाहूआ?
प्रताप: सर जी,सच बताऊं तो हमलोग बहत तनाव मे हैं। समझ नहीं पारहे हैं कि क्या करें। कुछ भी अच्छा नहीं लगता। इसीलिए आप से कुछ सलाह लेने आया हूँ।

  मिश्रा जी: हँसतेहुए, यही बात है। ठीक है।कोई परिसानी नहीं है। तुम मे है समाधान। अच्छा पहले एक बात बताओ  की तुमलोग करते क्या हो?

 प्रताप: कुछ नहीं सर जी।

  मिश्र जी: यही है तुम्हारा परिसानी का कारण। तुम्हे ये जरूर पता है की जग मे हर जीब काम करता है। काम यानी कर्म  ही जीबन का उद्देश्य है। कर्म बिना जीबन बेकार ही है। जब कोई ब्यक्ति कभी अपना आग्रह के द्वारा प्रनोदित होके कुछ काम करता है इसे पूजा कहाजाता है। कर्म मानसिक चाप, बुरी प्रबृत्तियाँ तथा गरीबी कम करनेका सबसे असरदार बिकल्प है। शारीरिक सुस्थता और मानशिक सांति की असरदार पंथा है। 

  अविनाश: सर जी,कामयाबी कैसे मिलेगा?

  मिश्र जी,ऐसे तो कामयाबी दिलानेवाला ढेरसारे चीजें है। लेकिन वे सारे चीजें कठिन परिश्रम बिना निष्फल ही है। 

  प्रताप: सर जी, मुझे लोग अच्छा नहीं बोलते?

  मिश्र जी: कर्म अनिबार्ज्य है। कर्म मानब को समाज की साथ जोड़ता है। इसीलिए हमेसा अच्छा कर्म करना ही चाहिए। ऐसा ही समझो की स्वस्थ और शान्तिपूर्ण निबन के लिये, अच्छा कर्म मानब केलिए रोटी,कपड़ा,मकान तथा स्वछ बायु की बराबर है।
 अविनाश: काफी कोशिशें करचुका हुँ मगर कामयाबी मिला नहीं।

  मिश्र जी:होता होगा,मगर नाकामयाबी का भी कोई बजह होगी । इसिपर सायद तुम कभी मनन नहीं कियाहोगा। कामयाबी नहीं मिलनेतक काम करते जानेसे कभी न कभी कामयाबी मिलता ही है।
  तुमलोग किसी भी क्षेत्र मे कामयाबी पानेका लक्ष्यलेके जब निरंतर काम करते जाओगे तो सफलता मिलेगी ही। तुम जो सारे ब्यक्ति जोलोग कामयाबि की शिखर पे हैं वे ऐसे ही नही हैं।इसी के पीछे उनके अकलान्त कठिन काम यानी परिश्रम का परिणाम है।  हमेसा काम को खेल समझ के करते जाओ वेसा करने से तुम अपना कर्म या काम से असली मजा लेसकोगे। इसीलिए तुम से मेरा ये एक अच्छा सलाह की अपनिआप को काल से ही  हमेसा अच्छा काम मे नियोजन करालो सारे परिसानी अपनिआप खत्म हो जाएगी।
अविनाश और प्रताप अब नजदीकी एक प्रेस मे काम करते हैं। हमेसा कर्म तत्पर रहते हैं। शारीरिक और मानशिक स्वस्थता हेतु एक शांतिपूर्ण जीबन जी रहेहैं।

धनन्यबाद.....

  

  
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